जामताड़ा | उदलबनी
जामताड़ा जिले के एक सरकारी स्कूल से शिक्षा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चिंता और गुस्सा दोनों पैदा कर दिया है। यहां सैकड़ों बच्चों का भविष्य ऐसे भवन में दांव पर लगा है, जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। बावजूद इसके, वर्षों से शिकायतें देने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
बारिश आते ही रुक जाती है पढ़ाई, हर दिन बना रहता है खतरा
जामताड़ा प्रखंड के उदलबनी पंचायत स्थित राजकीय कृत मध्य विद्यालय, आसनचूहा में करीब 118 बच्चे पढ़ाई करते हैं। लेकिन जिस भवन में ये बच्चे शिक्षा ले रहे हैं, उसकी हालत बेहद खराब हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि यह स्कूल भवन 1952 में बना था और आज भी उसी पुराने खपरैल ढांचे में चल रहा है। समय के साथ दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और छत कई जगह से कमजोर हो गई है।

बारिश के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है। कमरों में पानी टपकने लगता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है और बच्चों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
कई बार गिर चुकी है छत की खपरैल, बच्चे हो चुके हैं घायल
स्कूल के शिक्षकों और बच्चों के अनुसार, क्लास के दौरान कई बार छत से खपरैल गिर चुकी है। इन घटनाओं में कुछ बच्चे चोटिल भी हो चुके हैं।
बच्चों का कहना है कि वे हर दिन डर के माहौल में पढ़ाई करते हैं। उन्हें हमेशा यह आशंका रहती है कि कहीं अचानक भवन का कोई हिस्सा गिर न जाए।
अभिभावकों का भी कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय हमेशा चिंतित रहते हैं।
जमीन का विवाद बना निर्माण में सबसे बड़ी बाधा
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, वर्तमान भवन गोचर जमीन पर स्थित है। इसी कारण नए भवन के निर्माण में तकनीकी अड़चन आ रही है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वे दूसरी जमीन देने के लिए तैयार हैं। सरकारी अमीन द्वारा जमीन की नापी भी पहले की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की सुस्ती और फाइलों में देरी के कारण बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव, ग्रामीणों ने दी कड़ी चेतावनी
स्कूल प्रबंधन समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को लिखित आवेदन दिया है।
अब ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर जल्द नया भवन नहीं बनाया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
उनका कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
Latest Follow-Up: निरीक्षण की तैयारी, जल्द हो सकता है फैसला
सूत्रों के अनुसार, इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। जिला प्रशासन द्वारा स्कूल भवन का निरीक्षण कराने की तैयारी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि अगर निरीक्षण रिपोर्ट में भवन को असुरक्षित घोषित किया जाता है, तो बच्चों को अस्थायी भवन में शिफ्ट करने और नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया तेज की जा सकती है।
हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि जर्जर भवन में बच्चों को पढ़ाना बेहद जोखिम भरा है। ऐसे मामलों में प्रशासन को तुरंत कदम उठाने की जरूरत होती है।
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
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