झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।
फर्जी कस्टमर केयर बनकर लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि आरोपी Google पर नकली कस्टमर केयर नंबर डालकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
कैसे फंसाते थे लोगों को?
जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को:
- Flipkart कस्टमर केयर
- Amazon अधिकारी
- Airtel Payment Bank प्रतिनिधि
- PhonePe सपोर्ट एजेंट
बताकर लोगों से संपर्क करते थे।
इसके अलावा PM किसान योजना और लोन दिलाने के नाम पर भी लोगों को झांसा दिया जाता था।
Google सर्च बना ठगी का हथियार
सूत्रों के अनुसार आरोपी Google पर फर्जी मोबाइल नंबर अपलोड करते थे।
जब कोई व्यक्ति Customer Care नंबर खोजता, तो वही नंबर सामने आता और लोग सीधे साइबर अपराधियों के संपर्क में पहुंच जाते। यहीं से शुरू होता था पूरा खेल।
Cashback और Gift Card के नाम पर ठगी
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी:
- Cashback ऑफर
- Refund Process
- Bank सहायता
- KYC Update
का बहाना बनाकर लोगों से PhonePe Gift Card बनवाते थे। इसके बाद Gift Card को तुरंत Redeem कर पैसे उड़ा दिए जाते थे।
Airtel Payment Bank यूजर्स भी बने निशाना
गिरोह Airtel Payment Bank यूजर्स को भी टारगेट करता था।

आरोपी Airtel Thanks App के जरिए लोगों को भ्रमित कर कार्ड बंद होने का डर दिखाते और फिर उसे चालू कराने के नाम पर बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे।
पुलिस ने ऐसे पकड़ा पूरा गिरोह
देवघर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जिले के कुछ इलाकों से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित हो रहा है।
इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक (साइबर अपराध) राजा कुमार मित्रा के निर्देश पर विशेष छापेमारी अभियान चलाया गया।
5 साइबर अपराधी गिरफ्तार
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
- मो. अल्ताफ
- राहुल रवानी
- अनिल महरा
- विकास कुमार दास
- बालदेव महरा
सभी आरोपी देवघर जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के निवासी बताए जा रहे हैं।
बरामद हुए मोबाइल और सिम कार्ड
पुलिस ने आरोपियों के पास से:
- 7 मोबाइल फोन
- 11 सिम कार्ड
- 3 प्रतिबिंब सिम
बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में इन उपकरणों का इस्तेमाल साइबर ठगी में होने की पुष्टि हुई है।
अपराध शैली ने बढ़ाई चिंता
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका बेहद खतरनाक है क्योंकि लोग अक्सर Google Search पर दिख रहे नंबर को असली मान लेते हैं।
इसी भरोसे का फायदा उठाकर अपराधी बैंकिंग और UPI संबंधी जानकारी हासिल कर लेते हैं।
क्या बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं आरोपी?
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि गिरफ्तार आरोपी किसी बड़े साइबर नेटवर्क का हिस्सा थे या नहीं।
संभावना है कि इनके संपर्क दूसरे राज्यों के साइबर अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं।
लगातार बढ़ रहा है डिजिटल फ्रॉड
देवघर और झारखंड के कई जिलों में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं।
खासतौर पर:
- फर्जी KYC
- Cashback Scam
- Loan Fraud
- Customer Care Fraud
के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
पुलिस ने जारी की चेतावनी
झारखंड पुलिस ने लोगों से अपील की है कि:
- Google पर दिखने वाले हर नंबर पर भरोसा न करें
- बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें
- अनजान लिंक और ऐप से बचें
- साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें
Latest Follow-up
सूत्रों के अनुसार पुलिस अब आरोपियों के डिजिटल डेटा और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।
संभावना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की पहचान भी हो सकती है।
निष्कर्ष
देवघर पुलिस की यह कार्रवाई दिखाती है कि साइबर अपराधी अब लोगों के भरोसे और तकनीक दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
Google Search जैसे साधारण प्लेटफॉर्म को भी ठगी का हथियार बनाया जा रहा है। ऐसे में डिजिटल सतर्कता अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।
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