रांची | विशेष रिपोर्ट
झारखंड में अवैध निर्माण कराने वाले लोगों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने नई नियमितीकरण नीति 2026 लागू करते हुए ऐसे भवन मालिकों को राहत का अंतिम मौका दिया है। इस नीति के तहत 31 दिसंबर 2024 से पहले बने अवैध निर्माण को निर्धारित शर्तों के साथ वैध कराया जा सकेगा।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भवन मालिकों को 60 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। यदि तय समय सीमा के अंदर आवेदन नहीं किया गया, तो प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण पर सीधे कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया जा सकता है।
🏠 किन भवनों को मिलेगा नियमित होने का मौका?
नई नीति के अनुसार, उन भवनों को नियमित किया जा सकेगा जो:
- 31 दिसंबर 2024 से पहले बने हों
- तय ऊंचाई और क्षेत्र सीमा के अंदर हों
- सरकारी भूमि या प्रतिबंधित क्षेत्र पर नहीं बने हों

सरकार का उद्देश्य है कि ऐसे भवन मालिकों को कानूनी राहत दी जाए, जिन्होंने अनजाने में या तकनीकी कारणों से भवन नियमों का पालन नहीं किया।
💰 कितना लगेगा शुल्क?
सरकार ने नियमितीकरण के लिए अलग-अलग श्रेणियों में शुल्क तय किया है:
- आवासीय भवन: लगभग ₹10,000 न्यूनतम शुल्क
- गैर-आवासीय भवन: लगभग ₹20,000 शुल्क
- पुराने छोटे निर्माण: लगभग ₹5,000 तक शुल्क
यह राशि भवन के आकार और उपयोग के अनुसार बदल सकती है।
📅 आवेदन की अंतिम तिथि और प्रक्रिया
सरकार ने भवन मालिकों को 60 दिन का समय दिया है। इस अवधि में:
- ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा
- जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे
- शुल्क का भुगतान करना होगा
इसके बाद संबंधित विभाग द्वारा जांच कर भवन को नियमित किया जाएगा।
❌ किन निर्माणों को नहीं मिलेगी राहत?
सरकार ने कुछ मामलों में साफ कर दिया है कि ऐसे निर्माणों को नियमित नहीं किया जाएगा:
- सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर बने भवन
- सड़क, नाला या जल स्रोत पर अतिक्रमण
- सुरक्षा या पर्यावरण के लिए खतरनाक निर्माण
ऐसे मामलों में सीधे कार्रवाई की जाएगी।
🚜 सरकार का सख्त संदेश
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो लोग निर्धारित समय के भीतर आवेदन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यानी:
- नोटिस जारी होगा
- अवैध निर्माण हटाया जाएगा
- जरूरत पड़ने पर बुलडोजर भी चल सकता है
सरकार का कहना है कि यह नीति शहरों में अवैध निर्माण की समस्या को नियंत्रित करने और सुरक्षित शहरी विकास सुनिश्चित करने के लिए लाई गई है।
📌 ताजा अपडेट (Follow-Up Angle)
सूत्रों के अनुसार, कई नगर निकायों में इस नीति को लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। जल्द ही:
- ऑनलाइन आवेदन पोर्टल सक्रिय किया जाएगा
- नगर निगम और नगर परिषद स्तर पर विशेष अभियान चलाया जाएगा
- भवन मालिकों को SMS और नोटिस के जरिए सूचना दी जाएगी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आने वाले समय में झारखंड के शहरों में अवैध निर्माण पर लगाम लगाने में अहम साबित हो सकता है।
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