कटोरे से काम तक: SMILE योजना से झारखंड में बदलेगी भिखारियों की किस्मत

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रांची | रिपोर्ट
झारखंड सरकार ने राज्य को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। केंद्र सरकार की SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना के तहत अब सड़कों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और धार्मिक स्थलों पर भीख मांगने को मजबूर लोगों की पहचान, सर्वे और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

इस पहल का मकसद केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि बेसहारा लोगों को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सम्मानजनक जीवन से जोड़ना है, ताकि वे मजबूरी में दोबारा सड़कों पर न लौटें।

नगर निकायों को मिले सर्वे के निर्देश

नगर विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निकायों को निर्देश दिया है कि वे दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के माध्यम से भिखारियों का व्यापक सर्वेक्षण शुरू करें।
इस सर्वे के जरिए:

  • भिखारियों की वास्तविक पहचान
  • आयु, स्वास्थ्य और पारिवारिक स्थिति
  • कार्य क्षमता और कौशल
  • पुनर्वास की जरूरत

जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी।

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सड़कों पर नहीं, अब काम पर दिखेंगे भिखारी: SMILE योजना से बदलेगी झारखंड की तस्वीर | Credit : Ai edited

पुनर्वास, इलाज और सुरक्षा की व्यवस्था

सर्वे पूरा होने के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से राज्यों को अनुदान दिया जाएगा। इस फंड से:

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  • पुनर्वास गृहों का संचालन
  • भोजन और आवास
  • स्वास्थ्य जांच और इलाज
  • सुरक्षा और परामर्श सेवाएं

सुनिश्चित की जाएंगी। साथ ही, योग्य लोगों को उनकी क्षमता के अनुसार व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें।

SMILE योजना से सशक्तिकरण का नया मॉडल

SMILE योजना का फोकस सिर्फ भिक्षावृत्ति तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में:

  • भिक्षावृत्ति में शामिल लोग
  • ट्रांसजेंडर समुदाय
  • अन्य हाशिए पर खड़े वर्ग

भी शामिल हैं।
इस योजना के तहत लाभार्थियों को पहचान पत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, काउंसलिंग और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रावधान है।

सरकार का लक्ष्य है कि इन लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से इतना मजबूत बनाया जाए कि वे सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।

भिखारियों की संख्या सरकार के लिए बड़ी चुनौती

2011 की जनगणना के अनुसार देश में करीब 37 लाख भिखारी थे। इनमें लगभग 25 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय से जुड़े थे।
झारखंड में उस समय भिखारियों की संख्या 10,819 दर्ज की गई थी, जिसमें:

  • 5,522 पुरुष
  • 5,297 महिलाएं

शामिल थीं।
हालांकि, 15 साल बाद यह संख्या बढ़ने की आशंका है। सरकार मानती है कि मौजूदा हालात पुराने आंकड़ों से काफी अलग हो सकते हैं, इसलिए नए सर्वे के आधार पर ही आगे की रणनीति बनाई जा रही है।

सरकार का स्पष्ट संदेश

झारखंड सरकार का कहना है कि अब उद्देश्य सिर्फ राहत देना नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक बदलाव लाना है।
सरकार चाहती है कि भिखारियों को सड़कों से हटाकर काम, कौशल और सम्मान से जोड़ा जाए और शहरी क्षेत्रों को स्थायी रूप से भिक्षावृत्ति मुक्त बनाया जाए।

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