भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया और व्यवहार में बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी है, जिससे देश की न्यायपालिका में पारदर्शिता, अनुशासन और समान अधिकारों को बढ़ावा मिलेगी। उनके इन कदमों ने न केवल वकील समुदाय में चर्चा पैदा कर दी है, बल्कि आम जनता के बीच भी न्याय की पहुँच और निष्पक्षता को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
⚖️ वीआईपी कल्चर की समाप्ति: अब कोई लाइन नहीं तोड़ सकेगा
सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से चली आ रही वीआईपी संस्कृति (VIP culture) को CJI सूर्यकांत ने सीधे तौर पर समाप्त करने का एलान किया है। पुराने समय में बड़े और प्रभावशाली वकील बिना औपचारिक प्रक्रिया के अपनी दखलंदाजी से मामले जल्दी सूचीबद्ध करवाने की कोशिश करते थे, लेकिन अब यह प्रथा पूरी तरह बदल दी गई है।
अब किसी भी आपात मामला कोर्ट में तभी सुना जाएगा जब उसके लिए लिखित मेंशनिंग (written request) प्रस्तुत किया गया हो। मौखिक (oral) मेंशनिंग को अब एक सामान्य सुविधा के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी और केवल अत्यधिक असाधारण मामलों में ही इसे स्वीकार किया जाएगा।

CJI सूर्यकांत के अनुसार यह कदम न्याय की पारदर्शिता, प्रक्रिया की स्पष्टता और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगा और न्याय की प्राथमिकताओं को प्रभावित करने वाली किसी भी “नज़रअंदाज़ की गई परंपरा” को समाप्त करेगा।
📋 मौखिक मेंशनिंग पर सीमा
अब से वकीलों को मौखिक तौर पर अपने मामलों को लिस्ट करवाने के लिए कोर्ट में सीधे अपील करने की अनुमति नहीं है। केवल उन मामलों में ही मौखिक मेंशनिंग मान्य होगी जिनमें व्यक्तिगत आजादी या जीवन-मृत्यु जैसे अत्यंत गंभीर मुद्दे हों। अन्य सभी मामलों के लिए लिखित आवेदन और औपचारिक प्रक्रिया को अपनाया जाएगा।
इससे कोर्ट रजिस्ट्री में अनुशासन और समयबद्धता बनी रहेगी, और वकीलों तथा जनता को एक ही जैसी प्रक्रिया और अधिकार मिलेंगे।
📌 अन्य सुधार और गंभीर निर्देश
सूर्यकांत की बेंच ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री (registry) में भी सुधार करने का संकल्प लिया है, ताकि सूचीबद्ध मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। एक dismissed (खारिज) प्राथमिकी को अचानक दूसरी बेंच में लिस्ट कर दिए जाने के मामले पर उन्होंने सुधार की दिशा में कदम उठाने का वादा किया है।
उनके अनुसार रजिस्ट्री में प्रशासनिक दोष और प्रक्रियागत लापरवाही न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाते हैं, और यदि सुधार नहीं किया गया तो यह न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को चैलेंज करेगा।
🔄 NJAC पुनरावलोकन की संभावना
CJI सूर्यकांत ने National Judicial Appointments Commission (NJAC) के पुनर्जीवन के मुद्दे को भी खुले तौर पर जांचने की संभावना जताई है, जिससे न्यायपालिका के भीतर नियुक्ति व्यवस्था के पारदर्शिता और जवाबदेही पर राष्ट्रीय बहस फिर से सामने आ रही है। इसका मतलब है कि परंपरागत Collegium system पर सवाल उठाए जा सकते हैं और नियुक्तियों की प्रक्रिया में सुधार पर विचार किया जा सकता है।
यह कदम न्यायपालिका की स्वतंत्रता और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने के प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।
📌 निष्कर्ष
CJI सूर्यकांत के इन फैसलों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सुप्रीम कोर्ट अब अनुशासन, प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय में समान अवसर को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
वीआईपी संस्कृति को समाप्त करना और लिखित प्रक्रिया को प्राथमिकता देना न्यायिक प्रणाली को मजबूत बनाता है और आम नागरिकों का विश्वास बढ़ाता है।
यदि ये सुधार निरंतर और दृढ़ता से लागू होते हैं, तो भारत संभवतः एक नए न्यायिक युग की ओर बढ़ रहा है – जहाँ न्याय सहज, निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से जनता तक पहुँचे।
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