गिरिडीह | पीरटांड़
झारखंड की आस्था और आदिवासी परंपरा का प्रमुख केंद्र मारांग बुरू पारसनाथ एक बार फिर सुर्खियों में है। 20 फरवरी को बाहा पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आगमन की सूचना के बाद गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
यह सिर्फ एक धार्मिक पर्व की तैयारी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सक्रियता का संकेत बन चुका है।
🌿 बाहा पर्व: परंपरा और पहचान का उत्सव
बाहा पर्व संथाल समुदाय का महत्वपूर्ण प्रकृति उत्सव है, जो वनों, पहाड़ों और प्रकृति के प्रति आस्था को दर्शाता है। मारांग बुरू को संथाल समाज में विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। ऐसे में मुख्यमंत्री की मौजूदगी इस पर्व को और अधिक प्रतीकात्मक बना रही है।

🚨 प्रशासनिक मुस्तैदी: सड़क से सुरक्षा तक
मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए
- एसडीपीओ सुमित प्रसाद
- बीडीओ मनोज मरांडी
- सीओ हृषिकेश मरांडी
- थाना प्रभारी संजय यादव
- दीपेश कुमार
ने स्वयं क्षेत्र का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की।
सड़क मरम्मत, बिजली व्यवस्था, पेयजल, अस्थायी पार्किंग और यातायात रूट चार्ट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षा घेरा और प्रवेश-निकास मार्गों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
🎉 सज रहा है पूरा इलाका
पीरटांड़ और आसपास के क्षेत्रों में
- स्वागत द्वार
- होर्डिंग
- पारंपरिक बैनर
- जनजातीय प्रतीकों की सजावट
तेजी से लगाई जा रही है। बाहा पर्व समिति भी पारंपरिक अनुष्ठानों की तैयारियों में जुटी है ताकि पर्व को व्यापक और भव्य रूप दिया जा सके।
🔍 सिर्फ पर्व या राजनीतिक संदेश?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में मुख्यमंत्री की मौजूदगी सांस्कृतिक जुड़ाव का संकेत है। बाहा पर्व जैसे पारंपरिक आयोजन में शीर्ष नेतृत्व की भागीदारी सामाजिक संदेश भी देती है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता सिर्फ शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित करना है।
📌 स्थानीय लोगों की उम्मीदें
स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की उम्मीद है कि इस दौरे से
- सड़क और बुनियादी ढांचे में स्थायी सुधार
- क्षेत्रीय विकास योजनाओं को गति
- पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा
मिल सकता है।
🔎 निष्कर्ष
20 फरवरी को बाहा पर्व सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रशासनिक तैयारियों, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक उपस्थिति का संगम बन सकता है। अब सभी की नजरें उस दिन पर टिकी हैं, जब मारांग बुरू में परंपरा और सत्ता एक मंच पर नजर आएंगे।
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